Saturday, May 21, 2022
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Basant Panchami kab hai | बसंत पंचमी कब है 2022

Basant Panchami 2022: वसंत ऋतु के आते ही प्रकृति का कण-कण खिल उठता है मानव तो क्या पशु-पक्षी तक उल्लास से भर जाते है हर दिन नई उमंग से सूर्योदय होता है और नई चेतना प्रदान कर अगले दिन फिर आने का आश्वासन देकर चला जाता है।

यूं तो माघ का ये पूरा महीना उत्साह देने वाला है परन्तु बसंत पंचमी का पर्व भारतीय जनजीवन को अनेक तरह से प्रभावित करता है। प्राचीन काल से इसे ज्ञान और कला की देवी माँ सरस्वती का जन्मदिवस माना जाता है। बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए उनकी आराधना करनी चाहिए।

खास कर विद्यार्थियों के लिए ये दिन बड़ा ही शुभ माना जाता है जो भी विद्यार्थी इस दिन सूर्योदय से पहले जागकर स्नानादि करता है और माँ सरस्वती की पूजा करता है माँ सरस्वती उनपर कृपा बरसाती है और उनके मन को ज्ञान के प्रकाश के तेज से भर देती हैं। ऐसे विद्यार्थी की स्मरण शक्ति के साथ ही उनकी ज्ञान प्राप्ति की जिज्ञासा को बढाती है।

आज हम आपको इस लेख में साल 2022 (Basant Panchami) बसंत पंचमी शुभ तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है, इस दिन कौन से कार्य करने वर्जित माने जाते जाते है और इस दिन सफतला प्राप्ति के लिए किये किये जाने वाले कार्यो के बारे में बताएँगे।

Basant Panchami kab hai | बसंत पंचमी कब है 2022
Basant Panchami kab hai | बसंत पंचमी कब है 2022

बसंत पंचमी शुभ मुहूर्त 2022 (basant panchami 2022)

साल 2022 में बसंत पंचमी का पर्व5 फरवरी शनिवार के दिन मनाया जायेगा।
पंचमी तिथि प्रारम्भ होगा5 फरवरी शनिवार प्रातःकाल 03 बजकर 47 मिनट पर।
पंचमी तिथि समाप्त होगा6 फरवरी रविवार प्रातःकाल 03 बजकर 46 मिनट पर।
बसंत पंचमी पूजा का शुभ मुहूर्त होगा5 फरवरी शनिवार प्रातःकाल 07 बजकर 07 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक।

बसंत पंचमी कब मनाया जाता है? ((Basant Panchami Kab Manaya Jata Hai?)

माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी मनाया जाता है। इस विद्या की देवी माँ सरस्वती का जन्मोत्सव और उनका पूजा किया जाता है। इस दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र रहेगा साथ ही इस दिन बुधादित्य और केदार योग का संयोग रहेगा। जिस कारण इस दिन का महत्त्व कई गुना अधिक बढ़ जायेगा।

इसी दिन से वसंत ऋतू का आरम्भ होता है। मान्यता है की आज के दिन देवी सरस्वती की आराधना करने से कार्यों में सफलता बुद्धि और विद्या की प्राप्ति होती है। माँ सरस्वती की पूजा के लिए समर्पित बसंत पंचमी का पर्व इस साल 5 फरवरी दिन शनिवार को मनाया जायेगा।

बसंत पंचमी पूजा विधि (basant panchami puja vidhi)

Basant Panchami : बसंत पंचमी के दिन ज्ञान की ज्ञान देवी माँ सरस्वती की पूजा का विधान है। इस दिन प्रातःकाल स्नान के बाद पूजास्थल पर माँ सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करें और प्रतिमा को पीले रंग के वस्त्र व फूल अर्पित करें। अब पूजा के स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबों को रखकर इनकी भी पूजा करें और सरस्वती की वंदना का पथ कर लें। आज के दिन धन की देवी माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु पूजा की पूजा भी करना चाहिए। पूजा स्थल पर माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु जी की प्रतिमाएं स्थापित कर श्री सूक्त का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना गया है।

बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है? (basant panchami kyo manai jati hai?)

Basant Panchami : बसंत पंचमी हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार है और बसंत पंचमी को श्री पंचमी और ज्ञान पंचमी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस माँ सरस्वती का जन्म हुआ था। यह त्यौहार माघ के महीने में शुक्ल पंचमी के दिन मनाया जाता है पुरे वर्ष को 6 ऋतुओं में बाटा जाता है जिसमें

क्रम संख्याऋतुओं के नाम
1वसंत ऋतु
2ग्रीष्म ऋतु
3वर्षा ऋतु
4शरद ऋतु
5हेमंत ऋतु
6शीत ऋतु

शामिल है। इन सभी ऋतुओं में से वसंत को सभी ऋतुओं का राजा माना जाता है इसी कारण इस दिन को बसंत पंचमी कहा जाता है और इसी दिन बसंत पंचमी का त्यौहार देश भर में मनाया जाता है तथा इसी दिन से वसंत ऋतु की शुरुआत होती है इस ऋतु में खेतों में फसलें लहलहा उठती है औरफूल खिलने लगते हैं और हर तरफ खुशी नजर आती है।

मान्यता है की माता सरस्वती का इस दिन जन्म हुआ था इसलिए बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। माँ सरस्वती को विद्या एवं बुद्धि की देवी माना जाता है। बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती से विद्या, बुद्धि, कला एवं ज्ञान का वरदान मांगा जाता है।

विद्या बुद्धि के लिए करें ये पांच कार्य

बसंत पंचमी को देवी सरस्वती का दिन माना जाता है। शास्त्रों में इस दिन के लिए कुछ विशेष नियम बनाये गए है जिसका यदि पालन कर माँ की आराधना की जाय तो आपकी मनोकामना पूरा होता है और आपको हर कार्य में सफलता मिलता है तो आइये जानते है वो ऐसे कौन से पांच काम है जिन्हे आज के दिन करने से देवी सरस्वती होकर भक्तों को विद्या, बुद्धि और सफलता का वरदान देती है।

  • हथेलियों में माँ सरस्वती का वास होता है इसलिए बसंत पंचमी के दिन प्रातःकाल उठकर अपनी हथेलियां देखना चाहिए ये माँ सरस्वती के दर्शन करने के बराबर ही माना जाता है।
  • वसंत पंचमी के दिन कॉपी-किताबों में मोर पंख जरूर रखना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इससे छात्रों का मन पढाई में लगने के साथ ही पढाई पर उनका फोकस बढ़ता है।
  • वसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र पहनकर माँ सरस्वती की पीले फूलों से पूजा कर उन्हें पीली मिठाई का भोग लगाना चाहिए।
  • वसंत पंचमी के दिन छात्रों को माँ सरस्वती की आराधना कर उनके मंत्रों का जाप करने से विद्या और बुद्धि प्राप्त होता है।
  • वसंत पंचमी के दिन शिक्षा से जुडी चींजो को दान में देने से शुभ फल प्राप्त होते है।

वसंत पंचमी पर क्या ना करें (basant panchami par kya na kare)

इस साल बसंत पंचमी उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र, बुधादित्य, सिद्धि योग और केदार योग के संयोग में मनायी जायेगी। ज्योतिष अनुसार इस शुभ योगों और शुभ दिन पर सभी को कुछ नियमों का पालन करते हुए माँ की आराधना उपाय करने चाहिए ताकि आपको माँ सरस्वती के आशीर्वाद विद्या, धन और सुख-समृद्धि प्राप्त हो सके। तो आइये जानते है इस दिन क्या नहीं करना चाहिए…

  • इस दिन बिना स्नान किये भोजन नहीं करना चाहिए।
  • बसंत पंचमी पर पीले रंग का विशेष महत्त्व माना गया है इसलिए बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा के दौरान किसी और रंग के बजाय माँ को पीले रंग का वस्त्र अर्पित करें और खुद खुद भी पीले वस्त्र पहने ये बहुत ही शुभ होता है।
  • शास्त्रों की मानें तो वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे, फसल या पौधों की कटाई-छँटाई से परहेज करना चाहिए क्योंकि इस दिन से वसंत ऋतु का आगमन होता है।
  • बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा के दिन भूलकर भी क्रोध न करें और न ही किसी को अशब्द बोले।
  • इस दिन तामसिक चीजों का सेवन न करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।

बसंत पंचमी की पौराणिक कथा ((basant panchami katha)

सर्वप्रथम श्री कृष्ण जी और ब्रह्मा जी ने देवी सरस्वती की पूजा की थी। देवी सरस्वती ने जब श्री कृष्ण को देखा तो वो उनके रूप को देखकर मोहित हो गई और पति के रूप में पाने के लिए इच्छा करने लगी। इस बात का भगवान श्री कृष्ण को पता लगने पर उन्होंने देवी सरस्वती से कहा की वे तो राधा के प्रति समर्पित है परंतु सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए भगवान श्री कृष्ण को वरदान देते है कि प्रत्येक विद्या की इच्छा रखने वाले को माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी को तुम्हारा पूजन करेंगे। यह वरदान देने के बाद सर्वप्रथम ही भगवान श्री कृष्ण ने देवी की पूजा की।

दोस्तों शास्त्रों और पुराणों कथाओं के अनुसार बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा को लेकर एक बहुत ही रोचक कथा है जी की कुछ इस प्रकार है…

बसंत पंचमी की दूसरी पौराणिक कथा (basant panchami ki katha)

बसंत पंचमी के ऐतिहासिक महत्व को लेकर यह मान्यता है की सृष्टि रचइता भगवान ब्रह्मा ने जीवों और मनुष्यों की रचना की थी तथा ब्रह्म जी जब सृष्टि की रचना करके उस संसार को देखते है तो उन्हें चारों ओर सुनसान निर्जन ही दिखाई देता है एवं वातावरण बिल्कुक शांत लगता है जैसे किसी की वाणी न हो।

यह सब करने के बाद भी ब्रह्मा जी मायूस, उदास और संतुष्ट नहीं थे। तब ब्रह्मा जी भगवान विष्णु जी से अनुमति लेकर अपने कमंडल से जल पृथ्वी पर छिड़कते है, कमंडल से धरती पर गिरने वाले जल से पृथ्वी पर कम्पन होने लगता है और एक अद्भुत शक्ति के रूप में चतुर्भुजी मतलब चार भुजाओं वाली सुंदर स्त्री प्रकट होती है।

उस देवी के एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में वर मुद्रा होती है बाकि अन्य हाथ में पुस्तक और माला थी। ब्रह्मा जी उस स्त्री से वीणा बजाने का अनुरोध करते हैं, देवी के वीणा बजाने से संसार के सभी जिव-जंतुओं को वाणी प्राप्त हो जाती है। उस पल के बाद से देवी को सरस्वती कहा गया। दोस्तों उस देवी ने वाणी के साथ-साथ विद्या और बुद्धि भी दी इसलिए बसंत पंचमी के दिन घर में सरस्वती की पूजा भी की जाती है यानी दूसरे शब्दों में बसंत पंचमी का दूसरा नाम सरस्वती पूजा भी है।

बसंत पंचमी का महत्व ((basant panchami mahatva)

प्राचीन काल से बसंत पंचमी (Basant Panchami) को माँ सरस्वती का जन्मदिवस माना जाता है। जो शिक्षा, विद्या और भारतीयता से प्रेम करते है वे इस दिन माँ शारदा की पूजा कर उनसे और अधिक ज्ञानवान होने की प्रार्थना करते है। कलाकारों का तो कहना ही क्या जो महत्व सैनिकों के लिए अपने शस्त्रों और विजयादशमी का है जो विद्वानों के लिए अपनी पुस्तकों और व्यास पूर्णिमा का है जो व्यापारियों के लिए अपनी तराजू, बात, बही खातों और दीपावली का है वही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है।

बसंत पंचमी पौराणिक कथा डाउनलोड (basant panchami katha PDF download)

डिसक्लेमर: यहां बताई गई (basant panchami kab hai 2022) या किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। शुभ दिन पर व्यक्ति विशेष के लिए उसकी राशि के मुताबिक शुभ मुहूर्त क्या होगा, यह ज्योतिषाचार्य ही बता सकते हैं।

प्रिय पाठकगण,
आज के इस लेख में बस इतना ही था। हमे उम्मीद है की इनमें से सभी जानकरी आपको मिल गई होगी जैसे की basant panchami kab hai, बसंत पंचमी कब है 2022, basant panchami puja vidhi in hindi, पंचमी कब है, बसंत पंचमी, saraswati puja, vasant panchami, बसंत पंचमी कब है 2022, basant panchami in hindi और वसंत पंचमी का महत्व  

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राहुल गुप्ता कट्टर हिन्दू
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