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Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2022 Date, Mahatva Story in Hindi | द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कब है

Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2022 Date, Mahatva Story in Hindi | द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कब है
Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2022 Date, Mahatva Story in Hindi | द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कब है

Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2022 : गणेश चतुर्थी व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष और हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन गणेश जी की पूजा करने का विधान है। फाल्गुन मास में पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिहि को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से गणेश जी की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है और व्यक्ति के जीवन के सभी संकट दूर हो जाते है। आज हम आपको इस लेख में आपको फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी व्रत तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन किये जाने वाले उपाय के बारे में बताएंगे।

Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2022 Date, Mahatva Story in Hindi | द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कब है
Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2022 Date, Mahatva Story in Hindi | द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कब है

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त 2022 (Dwijapriya Sankashti Chaturthi Date)

साल 2022 में फाल्गुन मास की द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत20 फरवरी रविवार को रखा जायेगा
चतुर्थी तिथि प्रारंभ होगा19 फरवरी रात्रि 9 बजकर 56 मिनट पर
चतुर्थी तिथि समाप्त होगा20 फरवरी रात्रि 9 बजकर 5 मिनट पर
चन्द्रोदय का समय होगा20 फरवरी रात्रि 9 बजकर 50 मिनट पर20 फरवरी रात्रि 9 बजकर 50 मिनट पर

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत पूजा विधि (Dwijapriya Sankashti Chaturthi Vart Vidhi)

संकष्टी चतुर्थी के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजास्थल को गणजल से पवित्र कर ले। चतुर्थी की पूजा दोपहर के समय करने का विधान है इसलिए दोपहर पूजा के शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश जी की प्रतिमा पूजा स्थल पर स्थापित कर विधिवत पूजा करे।

पूजा में गणेश जी को धुप, दिप, कपूर, अक्षत और उनका प्रिय दूर्वा अर्पित करें। इसके बाद लड्डू और मोदक का भोग लगाये और उनके मंत्रों का जाप कर व्रत कथा पढ़े या सुने। अंत में गणेश जी की आरती कर पूजा संपन्न करें रात्रि में चन्द्रोदय के बाद चंद्रमा को जल का अर्घ्य देकर व्रत संपन्न करे।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी क्यों मनाया जाता है (dwijapriya sankashti chaturthi kyo manaya jata hai)

हर मास के संकष्टी को गणेश भगवान के एक अलग रूप का पूजन किया जाता है। फाल्गुन मास के संकष्टी के दिन गणेश भगवान के 32 स्वरूपों में से छ्ठे रूप द्विजप्रिय का पूजन किया जाता है। इसलिए इसे द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है।

द्विज का अर्थ है दो बार जन्म लेने वाला गणेश भगवान का द्विजप्रिय रूप हमें उस प्रसंग का याद दिलाता है। जब शिवशंकर भगवान ने गणेश जी का सर धड़ से अलग कर दिया था और हाथी का सिर उनके धड़ से जोड़ दिया था। इस प्रकार गणेश जी का दो बार जन्म हुआ।

फाल्गुन द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का महत्व (Dwijapriya Sankashti Chaturthi Mahatva)

इस बार फाल्गुन संकष्टी सर्वार्थ सिद्धि योग में है, इस दिन अमृत सिद्धि योग भी बना हुआ है। इसलिए इस दिन का महत्त्व कही अधिक होगा। फाल्गुन चतुर्थी के दिन गौरी पुत्र श्री गणेश जी का पूजन व व्रत करने से इस व्रत के प्रभाव से सुख-समृद्धि, आर्थिक सम्पन्नता के साथ ज्ञान का वरदान भी प्रभत होता है और इसके आलावा चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश की पूजा करने से व्यक्ति के सभी कार्य सिद्ध होता है।

द्विजप्रिय रूप में गणेश भगवान के चार सिर और चार हाथ है। गणेश जी के इस रूप की आराधना करने से अच्छा स्वस्थ्य और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। फाल्गुन मास के संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्त्व माना गया है जो संकष्टी चतुर्थी रविवार और मंगलवार को पड़ती है उसे अङ्गारक संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन सूर्योदय से लेकर चन्द्रमा उदय होने तक व्रत रखा जाता है। इस दिन व्रत रखने वाले भक्तों के सभी दुःख विघ्नहर्ता गणेश भगवान हर लेते है और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर देते है। संकष्टी के दिन भगवान गणपति की पूजा करने से घर से नकारात्मक प्रभाव दूर होता है और शांति बना रहता है।

ऐसा कहा जाता है कि गणेश जी घर में आ रही सारी बिपदाओ को दूर कर देते है और भक्त की सभी मनोकामना को पूरा करते है। चंद्र दर्शन भी चतुर्थी के दिन बहुत ही शुभ माना जाता है सूर्योदय से प्रारंभ होने वाला यह व्रत चंद्र दर्शन के बाद संपन्न होता है।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी उपाय (Dwijapriya Sankashti Chaturthi Upay)

शास्त्रों में फाल्गुन मास की चतुर्थी बहुत ही शुभ होती है इस दिन भगवान गणेश जी के 32 रूपों में से उनके छठे स्वरूप की पूजा की जाती है। गणेश जी को सभी देवों में प्रथम पूज्य माना जाता है। मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश जी की आराधना सच्चे मन और नियमो का पालन करते हुए की जाय तो गणेश जी के आशीर्वाद से व्यक्ति को सुख-समृद्धि का वरदान प्राप्त होता है। तो आइये जानते है इस दिन कौन से उपाय करने चाहिए…

  • फाल्गुन मास की द्विजप्रिय संकष्टी के दिन गणेश जी को पूजा के समय दूर्वा जरूर चढ़ाएं। इससे धन लाभ और मान-सम्मान बढ़ता है।
  • इस दिन शमी के पत्तो की माला गणेश जी को अर्पित करने से मनोकामनाएं पूरी होती है।
  • इस दिन व्रत करने के बाद जरूरतमंदों को तिल का दान करें। इससे भगवान गणेश जी प्रसन्न होते है।
  • संकष्टी चतुर्थी के दिन पांच दूर्वा में ग्यारह गांठे लगाकर इसे लाल धागे में बांधकर गणपति जी के पास रख दे। इसके बाद गणेश जी का ध्यान करें।

द्विजप्रिया संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा (dwijapriya sankashti chaturthi story)

द्विजप्रिया संकष्टी चतुर्थी की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार नदी किनारे भगवान शिव पार्वती बैठे थे, तभी माता पार्वती को चौपड़ खेलने का मन हुआ। वहा कोई तीसरा व्यक्ति न होने के कारण खेल में निर्णायक की भूमिका निभाने वाला कोई न था इसलिए भगवान शिव माता पार्वती ने मिट्टी की एक मूर्ति बनाकर उसमें जान डाल दी। 

दोनों ने मिटटी से बने बालक से खेल को अच्छी तरह देखकर बताने को कहा कि कौन जीता। खेल में माँ पार्वती ने महादेव को मात दी किन्तु भूल से बालक ने महादेव को जीता हुआ घोषित कर दिया जिससे माँ क्रोधित हो गई। गुस्से में माता पार्वती ने बालक को श्राप दे दिया जिससे वह लंगड़ा हो जाय बालक ने अपनी गलती के लिए लगातार माफ़ी मांगी तो माता का दिल पसीज गया।

और बोली श्राप तो वापस नहीं हो सकता लेकिन उन्होंने बालक को श्रम मुक्ति का उपाय बताया बालक ने पूरे विधान से व्रत किया और सच्चे मन से भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की। प्रसन्न होकर गणेश जी ने उसे श्राप मुक्त किया। इसी तरह मान्यता है कि जो भी चतुर्थी तिथि को व्रत कर उपवास करता है तो श्री गणेश जी उसकी सभी इच्छाओंको पूरा करते है।

द्विजप्रिया संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा डाउनलोड (dwijapriya sankashti chaturthi vrat katha PDF download)

डिसक्लेमर: यहां बताई गई (Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2022) या किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। शुभ दिन पर व्यक्ति विशेष के लिए उसकी राशि के मुताबिक शुभ मुहूर्त क्या होगा, यह ज्योतिषाचार्य ही बता सकते हैं।

प्रिय पाठकगण,
आज के इस लेख में बस इतना ही था। हमे उम्मीद है की इनमें से सभी जानकरी आपको मिल गई होगी जैसे की Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2022 Date, Mahatva Story in Hindi, द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कब है, dwijapriya sankashti chaturthi kab hai, 2022 की द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कब है, dwijapriya sankashti chaturthi 2022, sdwijapriya sankashti chaturthi in 2022 और द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2022  

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