Saturday, May 14, 2022
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Mahashivratri Kab Hai 2022 Date, Mahatva, katha in Hindi | महाशिवरात्रि कब है

Mahashivratri 2022 : महाशिवरात्रि का त्यौहार बहुत ही खास होता है जिस तरह से एकादशी की तिथि में व्रत करने से आपके सभी तरह के पापों का नाश होता है वैसे ही महाशिवरात्रि के व्रत को करने से आपके पापों का नाश होता है जीवन में दुःख दरिद्रता किसी भी तरह के कष्ट होते है उन सभी से हमें मुक्ति मिल जाती है।

शास्त्रों में महाशिवरात्रि का बहुत अधिक महत्त्व है। शिवपुराण के अनुसार महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुल मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस दिन शिव-भक्त शिव मंदिरों में महादेव की आराधना और जलाभिषेक करते है। प्राचीन कथाओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है की महाशिवरात्रि शिव भक्ति के मिलन का त्यौहार है और इस रात आध्यात्मिक शक्तियां जागृत होती है।

भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए महाशिवरात्रि का दिन सबसे उत्तम मन जाता है। बहुत से लोगों में साल 2022 महाशिवरात्रि तिथि को लेकर विरोधाभाष दिखाई दे रहा है। आज हम आपको इस लेख में साल 2022 महाशिवरात्रि पर्व की सही तारीख, 2022 में महाशिवरात्रि कब है, Mahashivratri 2022, पूजा का शुभ मुहूर्त, महाशिवरात्रि 2022 शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और साथ ही भगवान शिव की पूजा में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताएँगे।

Mahashivratri Kab Hai 2022 Date, Mahatva, katha in Hindi | महाशिवरात्रि कब है
Mahashivratri Kab Hai 2022 Date, Mahatva, katha in Hindi | महाशिवरात्रि कब है

अनुक्रम

महाशिवरात्रि शुभ मुहूर्त 2022 (mahashivratri 2022 shubh muhurat)

साल 2022 में महाशिवरात्रि का पर्व1 मार्च मंगलवार के दिन मनाया जायेगा
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होगा1 मार्च प्रातःकाल 3 बजकर 16 मिनट पर
चतुर्दशी तिथि समाप्त होगा2 मार्च प्रातःकाल 1 बजे
निशिथ काल पूजा का मुहूर्त होगा रात्रि 12 बजकर 8 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक
महाशिवरात्रि पारण का समय होगा2 मार्च सुबह 6 बजकर 45 मिनट पर
महाशिवरात्रि पहले प्रहर की पूजा का समय1 मार्च शाम 6 बजकर 21 मिनट से रात्रि 9 बजकर 27 मिनट तक
महाशिवरात्रि दूसरे प्रहर की पूजा का समय1 मार्च रात्रि 9 बजकर 27 मिनट से 12 बजकर 33 मिनट से
महाशिवरात्रि तीसरे प्रहर की पूजा का समय1 मार्च रात्रि 12 ब्जक्र 33 से सुबह 3 बजकर 39 मिनट तक
महाशिवरात्रि चौथे प्रहर की पूजा का समय2 मार्च सुबह 3 बजकर 39 मिनट से 6 बजकर 45 मिनट तक
व्रत के पराण का समय होगा2 मार्च बुधबार 6 बजकर 45 मिनट के बाद

महाशिवरात्रि कब है 2022 (mahashivratri kab hai)

महाशिवरात्रि का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। यह सभी महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक है, इस दिन देवों के देव महादेव का पूजन किया जाता है। हिंदी कैलेण्डर के अनुसार साल 2022 में महाशिवरात्रि का व्रत (mahashivratri ka vrat) 1 मार्च फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी को रखा जायेगा।

महाशिवरात्रि व्रत विधि (mahashivratri 2022 puja vidhi)

Mahashivratri Vrat Vidhi : शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। अब घर या फिर शिव मंदिर जनकर विधि-विधान से शिव जी का पूजन करें। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराकर ॐ नमः शिवाय मंत्र से पूजा करते हुए उन्हें बिल्व पत्र, धतूरा, चन्दन, पुष्प, धुप, दिप आदि श्रद्धा के साथ अर्पित करें।

अंत में शिव आरती और परिक्रमा कर पूजा संपन्न करें। महाशिवरात्रि पर रात्रि के चारों प्रहर में भी शिवजी की पूजा करनी चाहिए और अगले दिन प्रातःकाल ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करना चाहिए।

शिवरात्रि व्रतं नाम सर्व पाप प्रणाशनम्।

आचाण्डाल मनुष्याणां भुक्ति मुक्ति प्रदायकं।।

महाशिवरात्रि के दिन अभिषेक करने की विधि (mahashivratri ke din abhishek karane ki vidhi)

Mahashivratri Abhishek Vidhi in Hindi : अभिषेक की विधि बहुत ही सरल है आपको भगवान भोलेनाथ की पिंडी पे या शिवलिंग पे दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, गंगा जल चढ़ाकर अभिषेक कर लेना है और भगवान भोलेनाथ का पंचुक चार विधि से पूजन करना है यहाँ पर जो भी मौषमी पुष्प आपके पास मिले वह पुष्प आप ले आये बेल पत्र, धतूरे का फूल धुप, दिप इत्यादि चढ़ाकर भगवान भोलेनाथ का पूजन करना चाहिए और साथ ही साथ आपको कपूर से भगवान भोलेनाथ की आरती करनी चाहिए इस तरह से पूजन करते समय नमः शिवाय मंत्र का सतत रूप से जाप या स्मरण करते रहना चाहिए।

महाशिवरात्रि का व्रत कब रखें (mahashivratri ka vrat kab rakhe)

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का त्यौहार मनाया जाता है, साल 2022 में 1 मार्च 2021 की तारीख मंगलवार के दिन पर आप सभी को महाशिवरात्रि (shivratri 2022) का व्रत रखना है। महाशिवरात्रि का व्रत जब भी रखा जाता है वह त्रोयदशी युक्त चतुर्दशी होती है तो इसे बहुत अच्छा बताया जाता है इस दिन व्रत करने से भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद और कृपा आप को प्राप्त होता है।

जैसा की महाशिवरात्रि रात्रि का पर्व है चतुर्दशी तिथि की रात्रि आपको 1 मार्च की रात में मिलेगी इसलिये आपको 1 मार्च को ही व्रत रखना है और महाशिवरात्रि के पर्व (mahashivratri ke parv) का अनुष्ठान करना है महाशिवरात्रि के व्रत में आपको एक दिन पहले से ही साध्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए जिससे की आप शिवरात्रि का व्रत अच्छी तरह से रख पाए।

महाशिवरात्रि व्रत में सुबह के समय उठने के पश्चात स्नान आदि से निव्रत हो, भगवान शिव का अगर कोई मंदिर आपके घर के आस-पास है वह जाकर आप भगवान भोलेनाथ का पूजन करे उत्तर की तरफ़ मुह करे भगवान भोलेनाथ को स्नान कराये और उनका अभिषेक भी कर सकते है। आपको शिवरात्रि के दिन अभिषेक करने के लिए दो विशेष समय होते है। 

महाशिवरात्रि का महत्व (Mahashivratri ka Mahatva)

  • इस तरह से दोस्तों कहा गया है की शिवरात्रि का व्रत करने से सभी पापों का नाश होता है और बुरे-बुरे मनुष्य को भीमुक्ति-मुक्ति की प्राप्ति हो जाती है।
  • दोस्तों महाशिवरात्रि के दिन पर शिव लिंग का प्रादुर्भाव हुआ था इस लिए यह दिन बहुत ही खास है, साथ ही साथ कई जगह पर इसे शिव और पार्वती के मिलन की रात्रि भी बताया गया है।
  • दोस्तों हरेक तिथि के एक देवता होते है उसी प्रकार चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान भोलेनाथ शिव स्वय है इसलिए उनकी पूजा शिवरात्रि में करने से आपको विशिष्ट पल की प्राप्ति होती है

महाशिवरात्रि व्रत नियम (Mahashivratri Vrat Niyam)

शास्त्रों में प्रत्येक व्रत की तरह महाशिवरात्रि व्रत (mahashivratri vrat) के भी कुछ नियम बताए गए है जिनका पालन व्रती को अवश्य करना चाहिए ताकि भक्त को महादेव का आशीर्वाद प्राप्त हो सके तो आइये जानते है इस व्रत से जुड़े नियम क्या है?

  • शास्त्रों के अनुसार यदि चतुर्दशी तिथि पहले ही दिन निशीथव्यापिनी हो तो उस दिन महाशिवरात्रि का व्रत रखा जाता है।
  • महाशिवरात्रि के दिन व्रती को सबसे पहले सूर्योदयसे पूर्व उठकर जल में काले तिल डालकर स्नान करना चाहिए। 
  • भगवान शिव की पूजा के नियम के अनुसार भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि बेलपत्र के तीनो पत्ते पुरे हो इसका चिकना भाग शिवलिंग से स्पर्श करना चाहिए।
  • भगवान शिव की पूजा के दौरान कदम्ब और केतकी के फूल ना चढ़ाएं।
  • भगवान शिव की पूजा के दौरान ध्यान रखे की पूजा में जो अक्षत आप चढ़ाते है वो टूटे हुए ना हो।
  • भगवान शिव की पूजा करते समय शंख से जल नहीं चढ़ाना चाहिए।
  • शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर नारियल का पानी नहीं चढ़ाना चाहिए। शिव प्रतिमा पर नारियल चढ़ा सकते हैं लेकिन नारियल का पानी नहीं चढ़ाना चाहिए।
  • महाशिवरात्रि के दिन शिव पूजन करने से पहले नंदी की पूजा अवश्य करें। 
  • महाशिवरात्रि का व्रत जीवन पर्यंत किया जा सकता है लेकिन यदि ऐसा संभव ना हो तो चौदह वर्ष के बाद विधि-विधान के साथ इसका उद्यापन कर देना चाहिए। 
  • रात्रि के चारों प्रहरों में भगवान शिव की पूजा की जाती हैपूर्ण विधि से इस दिन की गयी पूजा व्रत से जागरण, पूजा, उपवास तीनों पुण्य कर्मों का एक साथ पालन हो रात्रि के चारों प्रहरों में भगवान शिव की पूजा की जाती हैपूर्ण विधि से इस दिन की गयी पूजा व्रत से जागरण, पूजा, उपवास तीनों पुण्य कर्मों का एक साथ पालन हो। 

महाशिवरात्रि पूजा में ना भूले ये चीजे (Mahashivratri Puja me na Bhule ye Chije)

महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त कई उपाय करते हैं। शास्त्रों में भगवान शिव की पूजा सबसे आसान बताया गया है। मान्यता है की भगवान शिव बेलपत्र, धतूरा और एक लोटा जल से भी प्रसन्न हो जाते है शायद इसीलिये शिवभक्त महादेव की पूजा में इन 3 चीजों को कभी नहीं भूलते।

यदि आप भी इस महाशिवरात्रि भगवान शिव को प्रसन्न करना चाहिए है तो महाशिवरात्रि के इस पावन दिन पर शिव पूजा के दौरान उन्हें पंचामृत से स्नान, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करना न भूलें ताकि आपको महादेव की पूर्ण कृपा प्राप्त हो सके।

महाशिवरात्रि व्रत उपाय (Mahashivratri Vrat Upay)

महाशिवरात्रि पर किये हुए कुछ उपाय व्यक्ति को जीवन में सफलता दिलाते है शास्त्रों में ऐसी मान्यता है की किसी भी शुभ योग में किये गए कार्य या उपाय कभी भी निष्फल नहीं होते है तो आइये जानते है महाशिरात्रि पर बन रहे शुभ योगों में कौन से उपाय किये जा सकते है…

  • भोलेनाथ को बेलपत्र बेहद प्रिय हैं। यदि महाशिवरात्रि पर शिव जी को मात्र चढ़ा दिए जाय तो इससे सुखी वैवाहिक जीवन का वरदान मिलता है। 
  • शिव पुराण के अनुसार महाशिवरात्रि योग में शिवलिंग का जल से अभिषेक करने पर सौभाग्य की प्राप्ति होती है। 
  • महाशिवरात्रि शुभ योग में शिव जी को धतूरा, आक का फूल, बेल अर्पित करने से शुभ फल प्राप्त होते है। 
  • महाशिवरात्रि के दिन शिव जी को अक्षत जरूर अर्पित करें इससे शिव जी प्रसन्न होकर आपकी हर मनोकामना को पूरा करते है। 
  • महाशिवरात्रि पर शिवलिंग को कच्चे दूध से अभिषेक करने पर व्यक्ति को आयोग्य की प्राप्ति होती है। 

महाशिवरात्रि के दिन भूलकर भी ना करें ये काम (mahashivratri ke din bhulkar bhi na kare ye kam)

महाशिवरात्रि शिव भक्तों के लिए बहुत खास मानी जाती है शिव पुराण के अनुसार प्रत्येक साल में महाशिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि के दिन आती है। ज्योतिष अनुसार साल 2022 में महाशिवरात्रि का पर्व (mahashivratri 2022) 1 मार्च मंगलवार के दिन मनाया जायेगा। मान्यता है की भगवान शिव जितनी जल्दी प्रसन्न होते है उतनी ही जल्दी रुष्ट भी हो जाते है इसलिए शास्त्रों के अनुसार शिव पूजा में कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। शास्त्रों की मानें तो कुछ ऐसी चीजे है जिसे शिव पूजा में निषेध माना गया है अर्थात जिन्हें शिव पूजा के समय शिवजी को अर्पित नहीं करना चाहिए चलिए जानते है। वो कौन सी चीजें हैं…

हल्दी ना चढ़ाएं

हल्दी न सिर्फ खानपान का स्वाद बढाती है वल्कि धार्मिक कार्यों में भी हल्दी का प्रयोग बहुत शुभ माना गया है। ज्योतिष अनुसार ऐसी मान्यता है की शिव जी की पूजा में उन्हें हल्दी नहीं चढ़ाना चाहिए। हल्दी का उपयोग खासतौर पर सौंदर्य प्रसाधनों के रूप में किया जाता है। हल्दी का प्रयोग भगवान विष्णु और सौभाग्य से भी माना जाता है। जिस कारण कहा जाता है कि महाशिवरात्रि पर महादेव को हल्दी नहीं चढ़ाना चाहिए।

कुमकुम या रोली से तिलक ना करे

कुमकुम या रोली का प्रयोगशास्त्रों के अनुसार शिव जी की पूजा में कुमकुम और रोली का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए। कुमकुम को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है जबकि भोले भंडारी वैरागी माने जाते है। प्राचीन मतों के अनुसार महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को उनकी पूजा के समय कुमकुम या रोली से तिलक नहीं करना चाहिए। बल्कि उन्हें चन्दन व् भष्म अर्पित किया जाय तो वे जल्दी प्रसन्न होते है और भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी करते है।

नारियल पानी ना चढ़ाएं

मान्यताओं के अनुसार भोलेनाथ को नारियल तो चढ़ाया जाता है लेकिन नारियल का पानी नहीं चढ़ाना चाहिए। शास्त्रों में नारियल पानी से भगवान शिव का अभिषेक करना वर्जित माना गया है। शास्त्रों में नारियल को माता लक्ष्मी का एक रूप माना गया है जिस कारण शिव पूजा के दौरान शिवजी को नारियल पानी नहीं चढ़ाना चाहिए।

टूटे हुए चावल ना चढ़ाएं

शास्त्रों में टूटे या खंडित चावल पूजा में प्रयोग करना शुभ नहीं माना जाता है। इसलिए महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा के दौरान उन्हें कभी भी टूटे हुए चावल या अक्षत नहीं चढाने चाहिए। पूजा में स्तेमाल होने वाले चावल जितने साबुत होंगे उतने ही शुभ फल देते है।

तुलसी के पत्ते ना चढ़ाएं

शास्त्रों के अनुसार शिव जी की पूजा में कभी भी तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाने चाहिए। पौराणिक कथाओं की माने तो जलंधर नामक असुर की पत्नी वृंदा के अंश से तुलसी का जन्म हुआ था। जिसे भगवान विष्णु ने अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया है। इसलिए कभी भी तुलसी से शिव पूजन नहीं किया जाता है।

उबला हुआ दूध ना चढ़ाएं

महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर जल व दूध से अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है। वाही शास्त्रों की मानें तो शिवजी की पूजा करते समय कभी भी उबला या गर्म दूध नहीं चढ़ाना चाहिए और न ही उबले दूध से अभिषेक करना चाहिए। मान्यता है की शिवलिंग का अभिषेक हमेश ठन्डे जल व दूध से करना चाहिए।

अधूरे खंडित बिल्व पत्र ना चढ़ाएं

भगवान शिव की पूजा में बिल्व पत्र का विशेष महत्त्व होता है, उन्हें बेलपत्र अर्पित करने से वे जल्दी प्रसन्न हो जाते है। मान्यता है कि बेलपत्र की पत्तियों में माता पार्वती का वास होता है तो वहीं तीन पत्तों वाले बेलपत्र को भगवान शिव के तीनों नेत्रों से जोड़ा गया है। इसलिए महादेव भूलकर भी खंडित या कटा-फटा बिल्वपत्र नहीं चढ़ाना चाहिए।

शंख का प्रयोग ना करें

मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने शंखचूड़ नकम एक असुर का वध कियता था। शंख को उसी असुर का प्रतीक समझा जाता है जो भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था। इसलिए भगवान विष्णु जी की पूजा तो शंख से होती है लेकिन शिव की पूजा में शंख का इस्तेमाल वर्जित माना जाता है।

सुबह देर तक ना सोये

महाशिवरात्रि के दिन देर तक नहीं सोना चाहिए यह दिन महादेव को प्रसन्न करने के लिए बेहद खास माना जाता है इस दिन प्रातःकाल उठकर भगवान शिव की आराधना व् उनका जलाभिषेक करने से सभी मनोकामना पुर्ण होती हैजो लोग इस दिन व्रत व्रत न रख सके उन्हें कोशिश करनी चाहिए प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान के बाद भगवान शिव की आराधना के बाद ही भोजन ग्रहण करे इससे जीवन शुभता बढ़ती है।

महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर चढ़ाये ये चीजें (Mahashivratri ke Din Chadhaye ye Chijen)

इस दिन बाबा को प्रसन्नइस दिन बाबा को प्रसन्न करने के लिए भक्त धूम-धाम से इस पर्व को मनाते है और उनका जलाभिषेक करते है। अगर शिव पूजा विध-विधान के किया जाय तो वे भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते है। भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर क्या चीजें अर्पित करने चाहिए।

दूध से अभिषेक करें (mahashivratri ke din dudh se abhishek karen)

मान्यता है की भगवान शिव का दूध से अभिषेक करना बहुत ही शुभ होता है। कहते है की जो भी लोग महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ को ठंडा दूध अर्पित करते है उन्हें आरोग्य का वरदान मिलता है। दूध भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इसलिए इस दिन दूध से अभिषेक करना लाभकारी होता है।

महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर बिल्व पत्र चढ़ाएं (mahashivratri ke din bilvpatr chadhaye)

भगवान शिव की पूजा में बिल्व पत्र को विशेष स्थान दिया गया है। मान्यता है की भगवान शिव को बिल्व पत्र चढाने से एक करोड़ कन्याओं के कन्यादान का फल प्राप्त होता है। महाशिवरात्रि के दिन तीन पत्तियों वाले बिल्वपत्र को शिवलिंग पर जरूर अर्पित करना चाहिए इससे सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

महाशिवरात्रि के दिन गंगाजल से जलाभिषेक करें

पौराणिक कथाओं के अनुसार गंगाजी भगवान शिव जी की जटाओं में समाहित है। सभी नदियों में गनगा नदी को पवित्र स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन यदि गंगाजल मइ जल से भगवान शिव का अभिषेक किया जाय तो भक्त को मानसिक शांति और सुख की प्राप्ति होती है।

महाशिवरात्रि के दिन चीनी चढ़ाये (mahashivratri ke din chini chadhaye)

प्राचीन मान्यताओं और शास्त्रों की मानें तो शिवलिंग पर चीनी अर्पित करने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते है। महाशिवरात्रि के दिन भोले बाबा को चीनी अर्पित करना बहुत ही शुभ बताया गया है कहा जाता है की आज के दिन शिवलिंग पर चीनी अर्पित करने से आपको यश, वैभव और कीर्ति का वरदान प्राप्त होता है।

महाशिवरात्रि के दिन दही से अभिषेक करें (mahashivratri ke din dahi se abhishek kren)

शास्त्रों की मानें तो महाशिवरात्रि के दिन शिव जी का दही से अभिषेक करना चाहिए। इससे व्यक्ति को जीवन में स्थिरता और मनोकामनाएं पूर्ण होती है। मान्यताओं के अनुसार महादेव को रोजाना दही से अभिषेक करना शुभ होता है।

महाशिवरात्रि के दिन घी व शहद से अभिषेक करें

प्राचीन मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ को देसी घी शदद चढ़ाना बहुत ही बहुत ही शुभ माना जाता है। इससे भक्तों को धन वृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कहा जाता है की घी और शहद से अभिषेक करने पर भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते है।

महाशिवरात्रि के दिन गन्ने का रस चढ़ाये

गन्ने को मिठास और सुख का प्रतीक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार गन्ने का इस्तेमाल शुभ कार्यों के लिए किया जाता है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को गन्ने का रस अर्पित करना चाहिए। भगवान शिव पर गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करने से धन-धान्य की प्राप्ति होती है।

महाशिवरात्रि की प्रचलित कहानी (Mahashivratri Ki Prachalit kahani)

महाशिवरात्रि की पहली कहानी (mahashivratri ki pahali katha)

एक बार एक धनवान मनुष्य कुसंग व शिवरात्रि के दिन पूजन करती हुई किसी स्त्री के आभूषणों को चुराकर वहां से ले जाने का अपराध करने लगा और वह मारा गया किन्तु चोरी तक 8 प्रहर वह भूखा रहा और प्यास के कारण जगता रहा इसके कारण स्वतः ही शिवरात्रि का व्रत हो जाने के कारण भगवान शिव ने उस मनुष्य को सदगति प्रदान करी और उसे शिव धाम की प्राप्ति हुई।

महाशिवरात्रि की दूसरी कहानी (mahashivratri ki dusari katha)

शिवरात्रि के दिन एक शेर था वह शिकार को खोज कर रहा था उसे शिकार नहीं मिला अंत में वह वहा एक झाड़ी की आड़ में बैठ गया और अंदर वहां पर शिव जी की मूर्ति थी और वही पर एक बेल का वृक्ष था वही से एक हिरणी पर उसकी दृष्टि पड़ी वह भगती हुई गई उसने अपने पास पड़े हुए बेलपत्र को तोड़कर शिव जी पर गिरा दिया और उस हिरनी के पीछे भागने लगा परंतु वह हिरणी वहां से जीवित निकल गई।

इसी प्रकार प्रत्येक प्रहर के अंत में उसको वह हिरणी दिखाई देती और वह उसी तरह बेलपत्रों को तोड़कर शिव जी की पिंडी पर अनायासी चढाता गया परिणाम यह हुआ बिना जाने ही उसने शिव जी की चारो प्रहर में पूजा करी और महाशिवरात्रि का व्रत करे जिससे उस शेर की सदगति हुई और यह उस जीवन से मुक्त होकर शिव धाम को प्राप्त हुआ इस तरह से शिवरात्रि का व्रत सदैव करना चाहिए और भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करना चाहिए।

डिसक्लेमर: यहां बताई गई (mahashivratri kab hai 2022) या किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। शुभ दिन पर व्यक्ति विशेष के लिए उसकी राशि के मुताबिक शुभ मुहूर्त क्या होगा, यह ज्योतिषाचार्य ही बता सकते हैं।

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