Saturday, May 21, 2022
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Sakat Chauth 2022 Kab Hai | सकट तिल चौथ कब है

Sakat Chauth 2022 : कैलेण्डर के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को सकट चौथ व्रत रखा जाता है। इसे संकष्टी चतुर्थी, लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी, तिलकुट चौथ, तिलकुट चतुर्थी, संकटा चौथ, माघी चौथ, तिल चौथ आदि नामो से जाना जाता है। वैसे तो प्रत्येक मास में दो चतुर्थी तिथि आती है। एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में लेकिन इस सभी चतुर्थियों में माघ मास की सकट चतुर्थी का विशेष महत्त्व है।

इस दिन भगवान श्री गणेश जी के साथ-साथ भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय और चन्द्रदेव के पूजा का विधान है। आज हम आपको इस लेख में साल 2022 माघ मास सकट चौथ व्रत की सही तारीख, Sakat Chauth 2022,पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्र पूजन विधि, व्रत कथा और इसके जरुरी नियमों के बारे में बताएँगे

Sakat Chauth 2022 Kab Hai | सकट तिल चौथ कब है
Sakat Chauth 2022 Kab Hai | सकट तिल चौथ कब है

सकट तिल चौथ शुभ मुहूर्त 2022 (Sakat Chauth 2022 Date)

सकट या तिल चौथसाल 2022 में सकट चौथ का व्रत 21 जनवरी शुक्रवार के दिन रखा जायेगा
चतुर्थी तिथि प्रारंभ होगा21 जनवरी सुबह 8 बजकर 51 मिनट पर
चतुर्थी तिथि समाप्त होगा22 जनवरी सुबह 9 बजकर 14 मिनट पर
सकट चौथ के दिन चन्द्रोदय का समय होगा21 जनवरी रात्रि 9 बजे
पूजा का अभिजीत मुहूर्त होगादोपहर 12 बजकर 11 मिनट से दोपहर 12 बजकर 54 मिनट तक

सकट तिल चौथ पूजन विधि (Sakat Chauth Vrat Vidhi)

सकट चौथ व्रत महिलाओं द्वारा संतान की दीर्घायु की कामना के साथ निर्जल रखा जाता है। इस दिन श्री गणेशजी  भगवान शिव व माता पार्वती की विधिवत पूजा करें। व्रत के दिन प्रातःकल स्नान से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प करें और पुरे दिन निराहार रहते हुए रात्रि में चंद्रोदय के बाद चन्द्रमा को अर्घ्य देकर व्रत संपन्न करें।

पूजा के लिए सबसे पहले एक चौकी पर मिट्टी से बनी गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर प्रतिमा का श्रृंगार करें। अब उन्हें अक्षत, दूर्वा, लड्डू, पान, सुपारी, धूप, दीप अर्पित करें। पूजा में ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करते हुए नैवेद्य के रूप में तिल तथा गुड़ के बने हुए लड्डू का भोग अर्पित करे। अंत में व्रत कथा पढ़कर आरती करें और चन्द्रोदय के पश्चात चंद्र पूजन कर व्रत संपन्न करें।

चंद्रोदय पूजन विधि 

सकट चौथ का व्रत रात्रि में चंद्र पूजन कर व्रत के पारण के बाद ही संपन्न होता है। इस दिन चाँद की पूजा का विशेष महत्त्व है। चतुर्थी के दिन चाँद निकलने के पश्चात् चन्द्रमा को दूध मिले जल से अर्घ्य देते हुए तिल, गुड़ व दूर्वा अर्पित करें और उनके समक्ष धूप, दीप प्रज्वलित करते हुए चंद्रदेव से मनोकामना और व्रत की सफलता की कामना करते हुए व्रत संपन्न करें। 

सकट चौथ नियम (Sakat Chauth Niyam)

इस दिन महिलाएं भगवान गणेश जी का व्रत व पूजन कर चंद्रोदय के बाद चन्द्रमा की पूजा कर व्रत का पारण करती है। कहा जाता है कि यह व्रत करने से भगवान गणेश सन्तन के सारे कष्ट हर लेते है। मान्यता अनुसार इस व्रत में व्रती को पूजा करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे आज के दिन काले वस्त्रों का प्रयोग ना करें। चन्द्रमा को अर्घ्य देते समय जल के छींटे पैरों पर न गिरे और चन्द्रमा को अर्घ्य दिए बिना व्रत भी नहीं खोलना चाहिए।

सकट चौथ व्रत कथा (sakat chauth ki katha)

चौथ की प्रचलित कथाओं में से एक प्रचलित कथा के अनुसार एक बार विपदा पड़े देवता भगवान शिव के पास अपनी समस्या के निवारण के लिए गए तब भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्रों से पूछा की तुम दोनों में से कौन वीर है जो देवताओं के कष्टों का निवारण करेगा। तब कार्तिकेय ने स्वयं को देवो का सेनापति प्रमाणित करते हुए देव रक्षा का अधिकार सिद्ध किया। भगवान शिव ने गणेश जी की इच्छा पूछा तो उन्होंने कहा की मैं बिना सेनापति बने ही इनके संकट दूर कर सकता हूँ। 

इस पर महादेव ने दोनों को पृथ्वी की परिक्रमा करने को कहा और कहा की जो सबसे पहले पहले परिक्रमा पूरी करेगा वही वीर घोषित किया जायेगा। यह सुन कार्तिकेय पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल गए लेकिन गणेश जी ने अपने माता-पिता की 7 परिक्रमा करते हुए कहा की इनमें समस्त तीर्थ निहित है। गणेश जी की बात से सभी नतमस्तक हो गए और महादेव ने उनकी प्रसंशा करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया की  प्रत्येक कार्य से पहले तुम्हारी ही पूजा होगी। इसके बात पिता की आज्ञा से गणेश जी ने देवताओं के संकटों का भी नाश किया। 

सकट तिल चौथ उपाय (sakat chauth upay)

किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा किया जाता है। लेकिन चतुर्थी के दिन। लेकिन चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की विशेष तौर पर पूजा व उपाय करने से व्यक्ति के संकट समाप्त होकर उसे जीवन में सफलता मिलती है और उसकी सभी मनोकामनाएं भी पूरा होता है। आइये जानते है इस दिन कौन से उपाय करने चाहिए।

  • सकट चौथ के दिन धन प्राप्ति के लिए गणेश जी को पूजा में सुपारी अर्पित करें और फिर पूजा के बाद इसे कपड़े को लपेटकर अपनी तिजोरी में रख लें। 
  • किसी भी मनोकामना को पूरा करने के लिए चतुर्थी के दिन दाई सूंढ़ वाले गणपति जी का पूजा करें। 
  • सकत चौथ के दिन भगवान गणेश जी को 11 मोदक अर्पित करने से आपके सभी दुःख हो सकते है। 
  • भगवान गणेश जी को दूर्वा अतिप्रिय है इसलिए आज के दिन भगवान गणपति को 11 दूर्वा अर्पित कर रिद्धि-सिद्धि का वरदान प्राप्त किया जा सकता है।

सकट चौथ व्रत कथा डाउनलोड (sakat chauth vrat katha PDF download)

डिसक्लेमर: यहां बताई गई (Sakat Chauth 2022 Kab Hai) या किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। शुभ दिन पर व्यक्ति विशेष के लिए उसकी राशि के मुताबिक शुभ मुहूर्त क्या होगा, यह ज्योतिषाचार्य ही बता सकते हैं।

प्रिय पाठकगण,
आज के इस लेख में बस इतना ही था। हमे उम्मीद है की इनमें से सभी जानकरी आपको मिल गई होगी जैसे की Sakat Chauth 2022 Kab Hai, सकट तिल चौथ कब है, sakat chauth kab hai, तिल चौथ कब है, सकट चौथ कब है, तिल चौथ का व्रत कब है, 2022 की तिल चौथ कब है, til chauth 2022, sakat chauth in 2022 और सकट चौथ 2022  

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राहुल गुप्ता कट्टर हिन्दू
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